Articles Posted in the " Articles " Category

  • RSS Akhil Bharatiya Samanvay Baithak in Raipur

    A co-ordination meeting (Akhil Bharatiya Samanvay Baithak) of key office bearers of various RSS inspired organisations that work in different spheres of society, would be held at Raipur, Chhattisgarh from 10th September, 2022. This national level co-ordination meeting is held once a year. Sarsanghchalak Dr. Mohan Bhagwat Ji, Sarkaryavah Dattatreya Hosabale Ji, all five sah-sarkaryavahs and […]


  • Jangal Satyagraha and Rashtriya Swayamsevak Sangh : Satyagrahi Dr. Hedgewar

    Dr. Shreerang Godbole The Sangh sansthapak Dr. Hedgewar had three unshakeable views on nation-building – firstly, while one should be prepared to die for the nation should need arise, what is more important is to live for the nation; secondly, the nation’s salvation lies not in seasonal but rather in enduring patriotism; and thirdly, nation-building […]


  • स्वाधीनता का अमृत महोत्सव

    स्वाधीनता का अमृत महोत्सव आज जब देश की स्वाधीनता को ७५ वर्ष हो रहे हैं तो इस अवसर पर देश का हर नागरिक उल्लासित है। हमारे देश ने तमाम व्यवधानों और संकटों को पार करते हुए इन ७५ वर्षों की यात्रा तय की है। यह यात्रा अपने आप में रोमांचित करने वाली है। आज जब […]


  • Introspect, deliberate and move ahead!

    Introspect, deliberate and move ahead! Swarajya@75 should lead to work on tackling new internal & external threats, recast policy institutions and achieve economic self-reliance Dattatreya Hosabale Having completed 75-years after attaining independence from foreign rule, Bharat has embarked on new journey to play a rightful lead role globally. While next phase of its civilizational journey […]


  • भारतीय स्वाधीनता संग्राम और असम के क्रान्तिकारी

    भारतीय स्वाधीनता संग्राम और असम के क्रान्तिकारी श्रीमन्त शंकरदेव की पावन धरा भारतीय संस्कृति के ख्यात उद्घोष “वीरभोग्या वसुन्धरा” को चरितार्थ करती है। पूर्वोत्तर के द्वार कहे जाने वाले असम प्रदेश के क्रान्तिकारियों ने अपने द्वार पर ही ब्रिटिश सरकार से लोहा लिया था| दुर्भाग्य से एकपक्षीय ऐतिहासिक लेखन ने उनके नामों को भारतीय आम […]


  • গুৰু তেগ বাহাদুৰ জীৰ আত্মবলিদান

    দত্তাত্রেয় হোসবোলে,সৰকাৰ্যবাহ। ৰাষ্ট্ৰীয় স্বয়ংসেবক সংঘ। শ্ৰী তেগ বাহাদুৰজীৰ আত্মবলিদান । ভাৰতীয় ইতিহাসত নৱম গুৰু শ্ৰী তেগ বাহাদুৰজীৰ ব্যক্তিত্ব আৰু কৃতিত্ব এক উজ্জ্বল নক্ষত্ৰৰ দৰেই গৌৰৱময়। তেওঁ অমৃতসৰত পিতৃ গুৰু হৰগোবিন্দ জী আৰু মাতৃ নানকিজীৰ ঘৰত বাইচাখ কৃষ্ণ পঞ্চমীৰ ঘৰত জন্মগ্ৰহণ কৰিছিল। নানকশাহী বৰ্ষপঞ্জী অনুসৰি 1 মে, 2021 তাৰিখে পোহৰৰ 400 বছৰ সম্পূৰ্ণ কৰা হৈছে। যেতিয়া […]



  • संयुक्त राष्ट्र संघ – समीक्षा और परिवर्तन समय की आवश्यकता

    देवेश खंडेलवाल संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना 1945 में एक अंतरराष्ट्रीय संगठन के रूप में हुई थी. जिसके प्रमुख उद्देश्यों में उसके सदस्य देशों के मध्य पारस्परिक सहयोग, शांति और मित्रतापूर्ण व्यवहार को शामिल किया गया था. इस साल यह संस्था 75 साल पूरे कर चुकी है और अगर इस समयावधि की समीक्षा करे कि […]


  • दत्तोपंत ठेंगड़ी – एक श्रेष्ठ चिंतक, संगठक और दीर्घदृष्टा

    डॉ. मनमोहन वैद्य सह सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जिस समय स्वर्गीय दत्तोपंत ठेंगड़ी जी ने भारतीय मजदूर संघ की स्थापना की वह साम्यवाद के वैश्विक आकर्षण, वर्चस्व और बोलबाले का समय था. उस परिस्थिति में राष्ट्रीय विचार से प्रेरित शुद्ध भारतीय विचार पर आधारित एक मजदूर आंदोलन की शुरुआत करना तथा अनेक विरोध और अवरोधों […]


  • ॥ছাত্ৰসন্থাৰ নতুন ৰাজনৈতিক দল গঠনৰ দুঃস্বপ্ন ॥

    ॥ছাত্ৰসন্থাৰ নতুন ৰাজনৈতিক দল গঠনৰ দুঃস্বপ্ন ॥সদৌ অসম ছাত্ৰ —অসমৰ মাটিত ওপজা এটা জাতীয় অৰাজনৈতিক সংগঠন । আমাৰ জাতীয় জীৱনৰ সংকটে- সম্পদে ছাত্ৰসন্থাই জন্মলগ্নৰে পৰা অতন্দ্ৰপ্ৰহৰীৰ ভূমিকা পালন কৰা কথা সংগঠনটোৱে ডিঙিফুলাই কৈ আহিছে । আমাৰ জাতীয় ইতিহাসৰ এটা বিশেষ সন্ধিক্ষণত ছাত্ৰসন্থাই প্ৰসৱ কৰা ‘অসম গণ পৰিষদে’ আঞ্চলিকতাবাদৰ সুঁতিয়েদি এটা পৰ্যায়লৈ আগবাঢ়ি গৈ ৰাজনৈতিক অপৰিপক্কতা […]